भाषण

भारत मे� सुशासन तथ� दीर्घकालिक विका� का संचालन : एक संसद सदस्� की भूमिका

कोलकात� मे� ब्रिटि� उप-उच्चायुक्त स्कॉ� फर्सेडोन वु� के उस अभिभाष� का अं� जो उन्होंने वृहस्पतिवा� 28 अगस्� 2014 को स्वानीति कार्यक्र� के तह� भारती� उद्योग परिसंघ और ब्रिटि� उप-उच्चायोग कोलकात� द्वारा आयोजित ‘भार� मे� सुशासन तथ� दीर्घकालिक विका� का संचालन : एक संसद सदस्� की भूमिका� पर परस्पर संवा� आधारित सत्र मे� दिया था�

यह 2010 to 2015 Conservative and Liberal Democrat coalition government के तह� प्रकाशित किया गय� था
Scott Furssedonn-Wood MVO

देवियो और सज्जनो, संसद के सदस्यो�! आज यहां सुशासन तथ� दीर्घकालिक विका� पर आयोजित इस संवा�-सत्र मे� उपस्थि� होकर मुझे बड़ी प्रसन्नत� हो रही है�

मै� हमार� चा� वक्ताओ� सर्वश्री दिने� त्रिवेदी, प्रोफेसर राजी� गौड़ा, पी डी रा� तथ� प्रोफेसर सुगत बो� का हार्दि� स्वागत करता हू�- आपका बहुत-बहुत धन्यवा� कि आप अपने व्यस्त कार्यक्र� मे� से बहुमूल्य सम� निकालक� इस संवा�-परिचर्चा मे� पधारे।

इस सत्र का उद्देश्य है भारत मे� उत्तरदायित्व, सुशासन और विका� के संदर्भ मे� निर्वाचि� प्रतिनिधियों, खासक� एमपी (सांसदो�) की भूमिकाओं को समझना। मै� इस बारे मे� सुनन� को उत्सुक हू� कि संसद के भीतर और बाहर अपने कार्यो� के जरिए निर्वाचन क्षेत्� के स्तर पर परिवर्तन लाने की अपनी भूमिकाओं और अपने अनुभवो� को माननी� सांस� कि� प्रकार देखत� हैं।

इस सम� भारत मे� मौजू� होना रोमांच� है� इस सा� भारत ने दुनिया के समक्� अभूतपूर्� लोकतांत्रि� भागीदारी का श्रेष्� प्रदर्शन किया�

इस विशा� आम चुना� की सफलत� भारती� के स्वस्थ, जीवं� तथ� परिवर्तनशी� लोकतंत्र का प्रमाण है� पारदर्शी मानदंडों पर खर�, यह निर्वाचन दुनियाभर मे� भारती� इतिहास के एक कीर्तिमा� के रू� मे� देखा गय�, इससे जर� भी कम नही�, क्योंक� इसके सा� विका�, सरकारी उत्तरदायित्व तथ� आर्थिक संवृद्धि पर एक नए संकेंद्रित यु� का सूत्रपात हु� है� लोकतंत्र के इस विस्मयकारी विरा� प्रदर्शन को निकट से देखन� सचमु� एक सौभाग्� की बा� है�

भारत की जनसंख्या मे� युवाओं की तादा� इसकी एक वास्तविक शक्त� है- भारत के 1.25 अर� नागरिकों मे� से आध� 25 वर्ष से कम आयुवर्� से आत� हैं। इस सा� के निर्वाचन की एक महत्वपूर्ण विशेषत� इन युवाओं की बेमिसा� भागीदारी रही है� इस निर्वाचन मे� एक बड़ी संख्या ऐस� मतदाताओं की थी जो पहली बा� मतदा� के योग्� हु� है�, और देशभ� मे� राजनैतिक दलों के चुना� अभियानों मे� ऐस� हजारों युवाओं की सक्रिय भागीदारी रही� यह भारत के युवाओं की उस आकांक्षा का प्रती� है कि वे अपने दे� के भविष्य को आकार देने मे� एक अधिक विस्तृ� और निर्णायक भूमिका निभाना चाहत� हैं। कई स्वरूपों मे�, यह निर्वाचन युवा भारत की आवाज बन� है�.

आज का यह सत्र एक ऐस� संगठ� द्वारा संकल्पित तथ� प्रवर्ति� परियोजना का एक अं� है जो महत्वाकांक्षी, मेधावी, दे� की प्रगति मे� योगदान के लि� वस्तुत� अभिलाषी युवा भारत का उदाहरण पे� करता है�

स्वानीति प्रयास एक तटस्�, अलाभकारी संगठ� है, जो भारत भर के सांसदो� को विका� समाधान उपलब्ध करात� है� स्वानीति वर्तमा� मे� देशभ� के के 80 संसद-सदस्यो� के सा� मिलक� शिक्षा, लिंग, आजीविका तथ� स्वास्थ्� के मुद्दो� पर का� कर रह� है� स्वानीति की 8 सदस्यी� युवा टी� मे� दुनिया के श्रेष्� विश्वविद्यालयो�, जैसे- हार्वर्ड, ऑक्सफोर्�, स्टैनफोर्ड, आईआईटी तथ� आईआईएम के स्नातक सम्मिलित हैं।

नेतृत्� मं� (लीडर्स प्लेटफॉर्म) नामक परियोजना के एक अं� के रू� मे�, स्वानीति द्वारा विकासात्मक मुद्दो� पर सांसदो� के लि� निर्वाचन-क्षेत्� हेतु विशेषीकृ� शो� तथ� समाधान प्रस्तुत करने के उद्देश्य से, प्रक्षेत्र विशेषज्ञों से प्राप्� जानकारियां प्रस्तुत करते हु� गोलमेज परिचर्चा के माध्यम से कार्� किया जा रह� है� स्वानीति का लक्ष्य, सांसदो� को अपने संसदी� क्षेत्रो� मे� विका� पहुंचाने मे� मद� करने के संदर्भ मे�, उन्हें जानकारियों से लै� कर, तथ� उन्हें उच्च-स्तरी� विशेषज्ञता मुहैया कर� कर उनकी सहायता करना है� इसका उद्देश्य है, “युवाओ� के लि� सहजत� से स्कू� से का� पर (स्कू�-टू-वर्क) स्थानांतरण�, तथ� “हरि� ऊर्ज� कार्यान्वय� द्वारा रोजगार सृजन� जैसे मुद्दो� के समाधान के लि� सांसदो� को इन मुद्दो� के लि� खासतौर पर निर्मि� समाधान तथ� ज्ञा�-आधारित समर्थन-सहयो� उपलब्ध कराना। स्वानीति का कार्� सांसदो� द्वारा उठाए गए खा� सरोकारों तथ� चुनौतियो� को अभिन� समाधानों के माध्यम से हल करने पर भी केंद्रित है� हमें प्रसन्नत� है कि हम इस क्षेत्� मे� स्वानीति के कार्� मे� सहायता कर रह� हैं।.

और मै� खु� हू� कि हमार� सा� मौजू� चा� सम्मानित सांसदो� ने इतने उत्साह से इस अवसर को अंगीका� किया है�

किसी भी दे� मे�, सरका� के विभिन्� अं�, सम�-सम� पर अपने उन्ही� नागरिकों के लि� उदासी� और दुर्लभ हो सकते है�, जिनकी वे सेवा करते हैं। नागरिकों और सरका� के बी� इस खा� को पाटन� एक चुनौती हो सकती है� भारत जैसे दे� मे�, जो इतना विशा� और इतनी बड़ी जनसंख्या से युक्� है, यह चुनौती खासतौर पर घातक हो सकती है� किंत� संसद के निर्वाचि� सदस्� इस चुनौती को हल कर सकते है� और करते भी हैं। अपने संसदी� क्षेत्रो� द्वारा उनके हितो� का राष्ट्री� स्तर पर प्रतिनिधित्व करने के लि� निर्वाचि� एक सांस�, समाज के सबसे मूलभूत तबके के सरोकारों को उनके लि� सरका� द्वारा लि� जानेवाले निर्णयों तक पहुंचाने के लि� विशिष्� संपर्क सूत्� का का� करता है�

यह मेरा पर� सौभाग्� रह� है कि मै� ढ़ा� वर्षों तक लंदन के हमार� विदे� कार्यालय मे� राज्� मंत्री का निजी सचिव रहा। उनके विभा� मे�, मध्य-पूर्�, दक्षिण एशिय�, आतंकवा� निरो� तथ� कई सारे आकर्षक किंत� प्रायः चुनौतीपूर्� मुद्दे सम्मिलित हैं। सप्ताह मे� चा� दि� मै� उनके सा� रहता था; विदे� मंत्रियो�, राजदूतों तथ� वरिष्ठ नीतिनिर्माताओं के सा� मुलाका� करते हु�; या इराक, अफगानिस्ता�, पाकिस्ता�, कोलंबिया के चुनावी दौरो�, अथवा न्यूयार्� या जेनेवा मे� संयुक्� राष्ट्� की बैठकों के लि� की जानेवाली यात्राएं करते हुए।

लेकि� हर शुक्रवार, बिना किसी व्यवधा� के वह साउथ वेल्� के अपने संसदी� क्षेत्� मे� “सर्जरी� के लि� या अपने निर्वाचन क्षेत्� के लोगो� से खुली मुलाका� के लि� वापस लौटत� थे� वह बच्चों की शिक्षा संबंधी अपने निर्वाचकों की चिंताओ� या आस-पा� अपरा� की घटनाओं जैसे मामलों को भी उतनी ही गंभीरत� से लेते थे जितन� कि उनके लि� सप्ताह के शुरुआती भा� मे� अंतर्राष्ट्री� मामल� गंभी� होते� लेकि� वह अपने निर्वाचक क्षेत्� के लोगो� के सा� होने वाले संवादो� को उन्हें उन वैश्वि� मुद्दो� को समझाने तथ� इस बारे मे� उनकी रा� जानन� के अवसर के रू� मे� लेते थे कि सरका� उन मुद्दो� पर सही का� कर रही है या नहीं।

निर्वाचन क्षेत्� को आवश्यक बो� मानन� की बजाए लोकतंत्र के एक अनिवार्य स्तर के रू� मे� महत्� देने की वह प्रतिबद्धत� हमारी व्यवस्था के सांसदो� की एक सामान्� विशेषत� है और जहां तक मै� जानत� हू� यही विशेषत� भारती� व्यवस्था के बहुत से सांसदो� की भी है� और, मुझे यह कहते खुशी हो रही है कि यही वह प्रतिबद्धत� है जिसकी मांग निर्वाचक क्षेत्� के नागरिकों मे� निरंतर रहती है� यह लोकतंत्र, संचा�, निर्वाचि� सांस� द्वारा अपने निर्वाचन क्षेत्� के लोगो� के हितो� का समर्थन करने और उनके प्रत� जवाबदेही के लि� अत्यंत महत्वपूर्ण है और यही सुशासन का एक सशक्� आधार भी है�

बेशक, विभिन्� दे� अल�-अल� बिन्दुओं से शुरुआत करते है�, लेकि� हम सबके लि� जवाबदे� और प्रभावी संस्थाएं राज्� और समाज के बी� विश्वा� का सृजन करते हैं। सा� ही वे उन दबावों से भी निबटते है� जो अन्यथा दे� मे� टकरावो� का कारण बनते और ये दे� को आर्थिक क्षमता तथ� अपने नागरिकों को खुशहाली प्रदान करने मे� भी सक्ष� बनात� हैं। यह जितन� युनाइटेड किंगडम के लि� है उतना ही प्रासंगि� एशिय�, अफ्रीका या लैटि� अमेरिकी देशो� के लि� भी है� हम सब अपने नगरिको� के प्रत�- शिक्षा, रोजगार और बेहत� जीवन के निर्मा� के उनके सपनो� को साका� करने के लि� प्रतिबद्� हैं।

आर्थिक विका� लोगो� की आय बढ़ान� और गरीबी कम करने का सबसे महत्वपूर्ण साधन है� यह गरीबो� के लि� उनके परिवार की सहायता करने और अधिक स्थायी भविष्य निर्मा� हेतु रोजगार और अवसर का सृजन करता है� भारत के पा� महती आकांक्षा, ऊर्ज�, प्रतिभ� और उत्कृष्टता है� जबकि भारत समृद्ध� और वैश्वि� प्रभावित� के एक नए यु� मे� प्रवेश कर रह� है हम ब्रिटे� के लो� इस यात्रा मे� आपका पसंदीदा साथी बनने को उत्सुक हैं। ब्रिटे�-भारत की साझेदारी अधिक व्यापक, अधिक गहरी और मजबू� हो रही है� यह उचित रू� से बराबरी आधारित साझेदारी है जिसमें दोनो� लाभान्वि� होंगे। इससे हमार� दोनो� दे� एक दूसर� के अधिक निकट � रह� हैं। और यह हम दोनो� देशो� के अपने नागरिकों को अधिक सुरक्षित, समृद्ध और खुशहाल बनात� है�

मै� सीआईआई और स्वानीति प्रयास को आज के कार्यक्र� के आयोज� के लि� धन्यवा� देना चाहूंग� और मेरे लि� इस महत्वपूर्ण संवा� का हिस्सा बनना सम्मान की बा� है� इस अपराह्� मै� जोशीले विचा�-विनिमय के प्रत� आशान्वित हूं।

आप सबका बहुत-बहुत धन्यवा�!

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प्रकाशित 2 सितंबर 2014