ग्लोबल हा� टेबल: दुनिया मे� भारत की स्थिति
भारत मे� ब्रिटि� उच्चायुक्त सर जेम्� बेवन द्वारा शनिवार 14 मार्� 2015 को दिल्ली मे� हु� इंडिया टुडे कॉनक्लेव के दौरा� दि� भाषण की लिखि� प्रतिलिपि।

गांधी प्रतिम�: ब्रिटे�/भारत संबं�
शुरुआत मै� महात्म� गांधी को श्रद्धांजल� देने से करना चाहत� हूं। इस सुबह लंदन मे� हमार� प्रधानमंत्री डेवि� कैमर� और भारत के वित्� मंत्री अरुण जेटली की अगुवाई मे� अन्य गणमान्� लोगो� को उस महापुरुष की नई प्रतिम� के अनावरण के लि� ले जाया जाएगा।
गांधी प्रतिम� को ब्रिटे� के सबसे प्रतिष्ठित स्था�, लंदन की हृदयस्थली पार्लियामेंट स्क्वायर मे� स्थापि� किया जाएगा। आज गांधीजी की प्रतिम� विश्� इतिहास के दिग्गजों के सा� खड़ी हो जाएगी, जिनमें शामि� है� नेल्सन मंडेला और अब्राह� लिंकन।
यह ऐतिहासिक क्षण है- जो शायद बहुत पहले होना चाहि� था� आज ब्रिटे� ने आखिरका� उस महान हस्ती को सम्मानित किया है जिसन� ब्रिटि� साम्राज्� से लोहा लेकर उस� परास्त किया और भारत को स्वतंत्रता के पथ पर अग्रसर किया�
एक बा� गांधीजी से पूछा गय� था कि ब्रिटि� सभ्यता के बारे मे� उनके क्या विचा� हैं। उन्होंने कह� था कि यह एक बढ़िय� विचा� है� मुझे लगता है आज वह हम पर मुस्कुरा रह� हैं।
मैंन� शुरुआत गांधीजी से केवल इसलि� नही� की क्योंक� आज का दि� ब्रिटे� और भारत के लि� एक विशे� दि� है, बल्क� इसलि� कि उनके मूल्� उनके जीवन का� की तुलन� मे� आज अधिक प्रासंगि� हैं। गांधीजी के मूल्� � अहिंसा, लोकतंत्र, सहिष्णुत�, मानवाधिकार, सत्यनिष्ठा आज दुनिया भर मे� संकटग्रस्त हैं।
दुनिया की हालत
ब्रिटि� उच्चायुक्त आम तौ� पर लियो� ट्रॉटस्की का उद्धरण नही� दिया करते� हमारी राजनयि� सेवा मे� आम तौ� पर इस� प्रोत्साहि� नही� किया जाता� लेकि� ट्रॉटस्की ने एक ऐसी बा� कही थी जो सत्य भी थी और जोरदार भी� उन्होंने कह� था, “आपकी दिलचस्पी युद्� मे� नही� भी हो, लेकि� युद्� की दिलचस्पी आपमे� अवश्� हो सकती है”।
और 2015 मे� युद्� की दिलचस्पी हममे� हो रही है� आज हम जि� सबसे बड़ी चुनौती का सामन� कर रह� है� वह है वैश्वि� आतंकवाद। को� भी जग� सुरक्षित नही� है- ब्रिटे� और भारत तथ� आज यहां जि� देशो� का प्रतिनिधित्व किया जा रह� है- वे सब अपने कड़वे अनुभवो� से जानत� हैं।
हमें सिर्� ऐस� आतंक की ही चिंत� नही� करनी है जो राज्� व्यवस्था द्वारा प्रायोजि� नही� हैं। बल्क� पारंपरिक दे� भी, जो अपारंपरि� युद्� संचालि� करते है�, हमार� हितो� को नुकसान पहुंचाते हैं। ऐस� उदाहरण हमने यूरो� मे� देखा है जहां यूक्रे� की सीमाओं को बलपूर्वक बदलन� की कोशि� की गई� यह एक अत्यंत खतरनाक मिसा� है जिसे हममे� से को� भी स्वीका� नही� कर सकता�
इस खतरनाक दश� मे� हम जि� खतरो� का सामन� कर रह� है� वह केवल सैन्� प्रकृत� वाले ही नही� है�, बल्क� इसमे� जलवायु परिवर्तन या ईबोल� जैसी वैश्वि� महामारी भी शामि� है, जो किसी प्रत्यक्� युद्� या आतंकी हमले से अधिक जानलेव� हैं।
लेकि�, देवियो और सज्जनो मै� आशावादी हू� और मुझे एक प्रामाणि� आशावादित� के बारे मे� सोचन� पसंद है�
हालांक� यह सच है कि दुनिया आज से बी� सा� पहले की तुलन� मे� अधिक खतरनाक दिखती है, हमें कु� ऐतिहासिक संदर्भ ध्या� मे� रखना चाहिए। 21वी� सदी के बारे मे� बड़� तथ्य यह है कि लगभग इस दुनिया के सभी लोगो� के लि� उनके आज का अपना जीवन उनके पूर्वजों के जीवन की तुलन� मे� अधिक बेहत� हु� है, और आन� वाले दिनो� मे� उनके बच्चों का जीवन और भी बेहत� होगा�
हम मनुष्य आज पहले की तुलन� मे� अधिक स्वस्थ हैं। हमें बेहत� पोषण प्राप्� है� पहले की तुलन� मे� प्रसूत� के दौरा� माताओं की मृत्यु कम होती है और बचपन मे� कम बच्च� मरते हैं। हम पहले की तुलन� मे� अधिक लंबी आय� जीते हैं। एक औस� आदमी अब 50 सा� पहले की तुलन� मे� वास्तविक रू� से ती� गुना कमात� है�
पहली की तुलन� मे� हमें अधिक स्वतंत्रता प्राप्� है� अनौपनिवेशीकर� के बड़� दौ� और यूरो� मे� सर्वसत्तावादी राज्यो� के पत� के बा� 20वी� सदी मे� लोकतंत्र का दायर� निरंतर बढ़ता गय� है� आज हममे� से अधिकतर यह चुनन� के लि� स्वतंत्र है� कि वे कहां रहें, क्या पढ़ाई करें, कौ� सा व्यवसा� करें, दुकानो� मे� क्या खरीदे�, किसस� विवा� करें, बच्च� पैदा करें या नही�, कौ� से कपड़े पहने, अपने अवका� के सम� क्या करें�
हालांक�, अब भी लंबी दूरी तय करनी है, महिलाओ� के लि� दुनिया लगातार बेहत� बन रही है� हमारी जानकारी पहले की तुलन� मे� अधिक विस्तृ� हो गयी है और ज्ञा� अधिक लोगो� के लि� सुलभ है� आपका मोबाइल फो� दस सा� पहले दुनिया भर की सरकारो� के पा� उपलब्ध जानकारी की तुलन� मे� आज अधिक जानकारी उपलब्ध करात� है�
कु� मिलाकर, जीवन 2015 मे� अधिक बेहत� हु� है� हम पहले से अधिक अमी�, अधिक स्वस्थ, अधिक लंबे, अधिक बुद्धिमा�, दीर्घायु, अधिक जानकार, अधिक सुरक्षित और अधिक स्वतंत्र हु� हैं।
इन सबमे� भारत का स्था�
तो इस तर� हमारी दुनिया जटिल है, शानदार अवसरों से भरी होने के सा�-सा� भयान� चुनौतियो� से भरी हु� भी� ऐसी दुनिया मे� भारत का क्या स्था� है?
एक शब्द मे� मेरा उत्त� है: बेहद जरूरी� आज हमार� द्वारा सामन� की जा रही सभी प्रमुख चुनौतियो� के समाधान का भारत एक हिस्सा है या हो सकता है�
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आतंकवा�: ब्रिटे�, भारत और वे सभी दे� जिनक� आज यहां प्रतिनिधित्व किया जा रह� है एक ही प्रकार के खतरे से जू� रह� है�: भारत की सड़को� और हमारी खु� की सड़को� को सुरक्षित रखने के लि� हम भारत के सा� मिलक� घनिष्ठता से का� कर रह� हैं।
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अस्थिरता: अफगानिस्ता� मे�, उस दे� के पुनर्निर्माण और उसके दीर्घकाली� भविष्य को संवारन� मे� भारत की भूमिका महत्वपूर्ण है� दरअस� भारत के स्वय� की स्थिरत� इस उथ�-पुथल भर� क्षेत्� मे� व्यापक स्थिरत� के लि� प्रब� संभावनाओ� की रचना करती है�
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समृद्ध�: विकसित होती भारती� अर्थव्यवस्था से वैश्वि� प्रगति और विका� लाने मे� मद� मिलेगी�
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जलवायु परिवर्तन : प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात मे� हरित विका� का जैसा मॉडल शुरू किया, उससे चाहे तो पूरी दुनिया कु� � कु� सी� सकती है और दिसंबर मे� पेरि� मे� होने वल� वैश्वि� जलवायु परिवर्तन समझौते के रास्ते की रुकावटों को दू� करने मे� भारती� नेतृत्� की महत्वपूर्ण भूमिका होगी�
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संघर्ष: दुनिया भर मे� संयुक्� राष्ट्� के अभियानों मे� भारत की अग्रणी भूमिका संघर्षों को आरंभ होने से रोकन� तथ� पुराने संघर्षों को दोबारा छिड़न� से रोकन� मे� मददगार रही है�
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ज्ञा�: भारत मे� दुनिया के प्रतिभाशाली वैज्ञानि� और आविष्कार� है� � दुनिया के समक्� ऐसी को� समस्या नही� है जिसक� हल भारती� नही� ढूंढ सकते�
संक्षे� मे� कहें, तो दुनिया मे� एक मजबू� भारत की सक्रियता मेरे खु� के दे� सहित हर किसी के हि� मे� है�
यही कारण है कि इस महान दे� मे� व्यापक परिवर्तन लाने और इसकी पूरी क्षमताओं को विकसित करने के प्रधानमंत्री मोदी के अभियान का ब्रिटे� समर्थन करता है� यही कारण है कि संरा. सुरक्ष� परिष� मे� भारत की स्थायी सदस्यत� की मांग का ब्रिटे� समर्थन करता है� और क्योंक� मेरा मानन� है भारत 21वी� शताब्दी मे� बहुत तरक्की करेग�, इसी कारण हम सब आन� वाले दिनो� की ओर बड़� आत्मविश्वा� के सा� दे� सकते हैं।
निष्कर्ष: ती� पूर्वानुमा�
आयोजको� ने हमसे हमारी टिपण्णियों को एक पूर्वानुमा� के सा� खत्म करने कहा। भविष्य के बारे मे� अनुमान लगान� का का� केवल नासम� ही करते हैं। 1949 मे� अमेरिकी पत्रिक� पॉप्युलर मेकैनिक्� ने यह दुस्साहसिक पूर्वानुमा� किया था कि “निक� भविष्य मे� कंप्यूटर का वज� 1.5 टन से अधिक नही� होगा”। 1962 मे� ब्रिटि� म्यूजि� कंपनी डेका रिकॉर्ड्� ने एक युवा पॉ� समूह से कह� था कि वे उन्हें रिकॉर्� कॉन्ट्रैक्� नही� दे सकते क्योंक� “गिटार संगी� के दि� लदने वाले हैं”। बीटल्स को एक अधिक स्मार्� रिकॉर्� लेबल मिला�
लेकि� मुझे चुनौती स्वीका� करने दीजि� और मै� ती� पूर्वानुमा� के सा� अपनी बा� समाप्त करता हूं। 2020 तक भारत अधिक मजबू� होगा; भारत का ब्रिटे� के सा� और उन सभी देशो� के सा�, जिनक� प्रतिनिध� यहां मौजू� है�, अधिक घनिष्ठ संबं� होगा; और परिणामस्वरूप हमारी दुनिया और भी अधिक बेहत� बनेगी�