भाषण

प्रधानमंत्री मोदी के सा� द्विपक्षी� वार्ता के बा� प्रधानमंत्री श्रीमती थेरेसा मे का बयान: 7 नवम्बर 2016

भारत मे� अपने व्यापारि� शिष्टमंड� और द्विपक्षी� वार्ता के तह� थेरेसा मे ने दिल्ली मे� प्रधानमंत्री नरेंद्� मोदी के सा� एक प्रे� सम्मेल� आयोजित किया�

यह 2016 to 2019 May Conservative government के तह� प्रकाशित किया गय� था
प्रधानमंत्री

दिल्ली मे� आज मेरा स्वागत करने के लि� प्रधानमंत्री मोदी का धन्यवाद।

यूरो� के बाहर अपनी पहली द्विपक्षी� यात्रा पर मै� भारत आन� की इच्छुक थी, क्योंक� यह संबं� मेरे लि� पहले से भी अधिक मायन� रखता है�

भारत विश्� मे� एक प्रमुख शक्त� है- सबसे बड़� लोकतंत्र, सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था, संयुक्� राष्ट्� के शांत� अभियानों मे� दूसर� सबसे बड़� सहयोगी है�

एक ऐस� दे� जिसे हम संयुक्� राष्ट्� के सुरक्ष� परिष� मे� एक स्थायी पद पर देखन� चाहेंगे।

और यह ब्रिटे� का एक स्वाभावि� साझेदा� है�

हम भारत के सा� अपनी साझा समृद्ध�, अपने साझा सुरक्ष� की वज� से और विश्� मे� अच्छाई के लि� प्रयास करते ताकत के रू� मे� कार्� करना चाहत� हैं।

आज, प्रधानमंत्री मोदी और मैंन� मिलक� चर्च� की है कि कि� तर� हम हर क्षेत्� मे� सहयो� को और मजबू� कर सकते हैं।

साझा समृद्ध�

सबसे पहले, हमारी साझा समृद्ध�

एक नेता के रू� मे� हम अपने नागरिकों की आजीविकाओं को सुधारन� का प्रयास कर रह� है�- जिसक� लि� हम रोजगार निर्मा�, कुशलताओं का विका�, बुनियादी ढांच� मे� निवे� और भविष्य की प्रौद्योगिकियो� के क्षेत्� मे� सहायता देते हैं। इसी से ब्रिटे� के व्यापारियो� और निवेशकों के लि� भारत मे� अवसरों का निर्मा� होता है� और यही विपरी� क्रम मे� भी होता है�

अब स्मार्� शहरो� की परिकल्पन� को ही ले ले�-आज हम एक नई साझेदारी पर सहमत हु� है� जिसस� सरका�, निवेशक और विशेषज्ञ शहरी विका� की ओर सा� मिलक� कार्� करने के लि� एकजु� होंग�, जिसस� ब्रिटि� व्यापारियो� के लि� अगले पांच वर्षों के लि� दो बिलियन पाउं� के अवसर खु� जाएंगे�

इसके तह� मध्यप्रदेश जैसे गतिशी� राज्� पर ध्या� केंद्रित किया जाएग�-सा� ही किसी भी अन्य जग� की अपेक्ष� और अधिक स्मार्� शह� बनान� की योजन� है- और सा� ही शामि� होगा ऐतिहासिक शह� वाराणसी�

अब भारत की मूलभूत संरचनाओं मे� लगने वाली पूंजी की ही बा� करें तो जुला� मे� पहले मसाल� बॉन्� जारी होने के बा� से अब तक 900 मिलियन पाउं� के मूल्� के रुपय�-नामि� बॉन्� जारी हो चुके हैं।

और हमें अगले ती� महीनो� मे� 600 मिलियन पाउं� के मूल्� के चा� बॉन्� जारी होने की उम्मी� है�

यह भारत की विका� गाथा मे� विश्वा� मत की तर� है� और यह लंदन के विश्� के प्रमुख वित्ती� केंद्र के रू� मे� भी विश्वा� मत की तर� है�

इसके सा�-सा�, ब्रिटे� एक संयुक्� को� मे� 120 मिलियन पाउं� के निवे� पर सहमत हु� है जिसस� लंदन शह� से निजी क्षेत्� से निवे� के द्वा� भारत के बुनियादी ढांच� को वित्ती� सहायता देने की ओर खु� जाएंगे�

इसलि� दोनो� देशो� के पा� व्यावसायिक अवसरों को विस्तारि� करने की विशा� संभावनाए� हैं। केवल अकेल� इसी यात्रा पर एक बिलियन पाउं� के व्यापारि� सौदो� पर हस्ताक्ष� कि� जाएंगे�

लेकि� हम इससे अधिक बहुत कु� कर सकते हैं।

व्यापा� और निर्या�

हम दोनो� ही मुक्� व्यापा� के कट्ट� समर्थक हैं। हम दोनो� ही महान निर्यातक राष्ट्� बनना चाहत� हैं।

और इसलि� हमें व्यापा� और निवे� की रा� की बाधाओं को तोड़न� के लि� लंबी दौ� मे� सा� मिलक� कार्� करना चाहिए।

आज यहां हम बौद्धि� संपद� अधिकार के संरक्ष� और प्रवर्तन को मजबू� बनान� के लि� सहयो� के नए कार्यक्रमो� पर सहमत हु� है�, जो व्यापा� के लि� अधिक निश्चितत� प्रदान करता है�

और ब्रिटे� विनियम� मे� ढी� देगा और कर जैसे मुद्दो� पर अपनी तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान करेग� ताकि भारत मे� व्यापा� करना और आसान हो सके।

वीजा

हम आधिकारिक स्तर पर सुगठित वार्ता को बहाल करने पर सहमत हु� है�, ताकि यह जा� सकें कि ब्रिटे� के यूरोपी� सं� से अल� होने से पहले व्यापा� मे� बाधाओं को हटान� के लि� वर्तमा� मे� और क्या कर सकते हैं। और यही आग� चलकर ब्रिटे� के अल� होने के बा� एक गहरे व्यापा� और निवे� संबं� की रा� प्रशस्� करेगा।

प्रधानमंत्री मोदी और मैंन� ब्रिटे� आन� वाले भारती� यात्रियो� की व्यापारि� यात्रा को सुधारन� के मुद्दे पर भी चर्च� की� यूके अनेक भारतीयो� को सीमा पर बिना तकली� के और तेजी से निकासी की सुविधा प्रदान कर भारत को अपने पंजीकृ� यात्रियो� की योजन� तक आसानी से पहुंचन� वाला पहला वीजा राष्ट्� बनाएगा�

और हमने ‘ग्रेट क्लब� के लि� प्रमुख व्यापारि� अधिकारियों को चयनि� करने वाला पहला राष्ट्� बनने के लि� विश्� भर मे� से भारत सरका� को आमंत्रित किया है�

हम वीजा, वापसी और संगठित अपरा� जैसे गृ� मंत्रालय के मामलों पर रणनीति� बातची� स्थापि� करने पर सहमत हु� हैं।

इसके तह�, ब्रिटे� अपने वीजा के ऑफ� मे� आग� और सुधा� करेग� अग� उसी सम� हम ब्रिटे� मे� बिना किसी अधिकार के रहने वाले भारतीयो� के लौटन� की प्रक्रिय� अधिक ते� और अधिक मात्रा मे� करने का कद� उठ� सकें�

और ब्रिटे� सबसे प्रतिभावान और सर्वश्रेष्� भारती� विद्यार्थियो� को आमंत्रित करना जारी रखेगा। ताजा आंकड़ों के मुताबि� हर 10 मे� नौ आवेद� पत्रों को स्वीका� कर लिया जाता है�

सुरक्ष�

अब सुरक्ष� के मुद्दे की ओर रु� करते हैं।

पिछल� वर्ष, हम एक महत्वाकांक्षी रक्ष� एव� अंतराष्ट्री� सुरक्ष� साझेदारी को स्थापि� करने पर सहमत हुए।

हम इस प्रतिबद्धत� पर अडिग हैं। लेकि� अब हमें राजनीति� इच्छाशक्ति को नतीजो� मे� परिवर्ति� करने की आवश्यकता है� ब्रिटे� प्रौद्योगिकी के हस्तांतर� और अन्य बाजारो� मे� अपने रक्ष� उपकरणो� के साझा प्रचार के सा� ‘मेक इन इंडिया� के जरिए भारत की रक्ष� क्षमताओं को सहायता देने के लि� तैया� है�

अगले हफ्त� शीर्� रक्ष� अधिकारी दिल्ली मे� मुलाका� करेंगे� हमने उन पर सैन्� प्रशिक्ष� मे� प्रगति, प्रौद्योगिकी और उपकर� मे� सहयो� और नई क्षमताओं पर संयुक्� शो� का कार्यभार सौंप� हैं।

हम नए और उभरत� खतरो� के लि� प्रतिक्रिय� मे� एक दूसर� की सहायता करने की ओर भी प्रतिबद्� हैं।

अब जब दोनो� दे� डिजिटल नवाचारों मे� सबसे आग� है�, हम दोनो� ही अपनी अर्थव्यवस्थाओं को प्रौद्योगिकी द्वारा प्रदान कि� जाने वाले अवसरों से अवगत है�, लेकि� इसके खतरे भी हो सकते हैं।

ब्रिटे� और भारत दोनो� ही अन्य देशो�, आंतकवादियो� और साइबरस्पेस मे� सक्रिय अपराधियो� द्वारा साइब� हमले के बढ़ते खतरो� का सामन� कर रह� हैं।

हम पहले से ही साइब� अपराधो� के साझा खतरो� से निपटने की ओर संयुक्� स्तर पर प्रयास कर रह� हैं।

और आज, प्रधानमंत्री मोदी और मै� दोनो� देशो� के बी� एक साइब� ढांच� पर बातची� कर स्थापि� करने की ओर सहयो� पर सहमत हु� है�, जिसस� हमारी साझा साइब� सुरक्ष� बेहत� होगी, मुक्� और सुरक्षित साइबरस्पेस को बढ़ाव� मिलेगा और ब्रिटे� के उद्योगों के लि� व्यावसायिक अवसरों के द्वा� खु� जाएंगे�

अंतत: हम दोनो� ही साझा रू� से आंतकवा� का सामन� कर रह� है�-व्यक्तिग� देशो� के तौ� पर, सहयोगियो� के तौ� पर और नियमों पर आधारित प्रणाली की नींव पर बस� स्था� विश्� मे� रुचि रखने वाले वैश्वि� ताकतों के तौ� पर�

आज हम अपने सहयो� को मजबू� करने पर सहमत हु� है�, खासतौर से हिंस� उग्रवादियो� द्वारा इंटरने� के उपयो� से निपटने और ऑनलाइन भर्ती कर आतंकवा� की ओर नियुक्तिया� कम करने की ओर साझा रू� से प्रयासरत हैं।

निष्कर्ष

ये काफी अच्छी और रचनात्मक बातची� रही है�

जैसा मैंन� आज सुबह कह�, जब भारत और युनाइटेड किंग्ड� जैसे दो देशो� के बी� दीर्घकालिक संबं� रह� हो�, ऐस� संभव है कि कभी हम आपसी कड़ी नजरअंदाज कर दें।

मै� ऐस� नही� करना चाहती� मै� एक मजबू�, रणनीति� साझेदारी के लि� भविष्य और असीमि� संभावनाओ� की ओर देखन� चाहती हूं।

ब्रिटे� और भारत दोनो� देशो� का महत्वाकांक्षी, आत्मविश्वासी, वैश्वि� नजरिया है�

अब जब यूके यूरोपी� सं� से अल� होने जा रह� है और विश्� मे� भारत की कीर्ति बढ़ती जा रही है, हमें भविष्य की संभावनाओ� का ला� उठान� चाहिए।

हम अपने लोगो� के बी� मजबू� संबंधो� के जरिए यह हासि� कर पाएंगे, सा� ही ब्रिटे� और भारती� व्यापारियो� के सा� मिलक� का� करने के जरिए और उससे भी महत्वपूर्ण कारण यह है कि प्रधानमंत्री मोदी और मै� दोनो� ही इस संबं� मे� निवे� करने और इस परिकल्पन� को सार्थक करने की ओर व्यक्तिग� रू� से प्रतिबद्� हैं।

मै� दोनो� देशो� के ला� के लि� एक विशिष्� मैत्री संबं� बनान� और सा� कार्� करने की ओर आशान्वित हूं।

हमार� साझा संबं� और साझा मूल्� इस साझेदारी को स्वाभावि� बनात� है�, लेकि� हमार� साझा भविष्य ही हमें और करी� लाएगा।

प्रधानमंत्री की भारत यात्रा की नवीनत� जानकारी�

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प्रकाशित 7 नवंब� 2016