'नारीवा�, इस क्रांतिकारी विचा� को निरूपि� करता है कि स्त्री भी मनुष्य है'
युवाओं को महिलाओ� के विरुद्� हिंस� रोकन� के लि� मंगलवा�, 17 मार्� 2015 को दि� भाषण की लिखि� प्रतिलिपि।

महिलाओ� के खिला� हिंस� रोकन� तथ� सभी प्रकार के सामाजि� भेदभाव से निपटने के प्रत� व्यक्तिग� समर्थन करने के लि� यहां आन� की मुझे अत्यंत प्रसन्नत� है �
यह मेरे लि� व्यावसायिक रू� से अह� है- जब तक को� दे� कु� लोगो� की बजाए अपने सभी लोगो� की प्रतिभाओ� का उपयो� नही� करेग�, तबतक वह फल-फू� नही� सकता�
पर ती� लड़कियो� के पिता के रू� मे� व्यक्तिग� रू� से मेरे लि� महिलाओ� के अधिकार भी मायन� रखते हैं। मेरी सबसे छोटी बेटी अपना सत्रहवाँ जन्मदि� मन� रही है: और मै� चाहत� हू� कि वह ऐसी दुनिया मे� पल�-बढ़�, जहां उसकी उपलब्ध� की को� सीमा � हो�
सबसे पहले मै� आप सभी को बधाई देना चाहत� हूं। आज की सुबह यहां उपस्थिति आप सभी युवा भारती� इसलि� यहां है� क्योंक� आप खा� हैं। आपने कड़� चय� प्रक्रिय� को झेला है� आपकी प्रोफाइल्स बताती है� कि आपने पहले ही अविश्वसनी� चीजे� हासि� की हैं। संदे� एक ही है: अपने आप मे� भरोस� रखें, क्योंक� आप इसकी काबि� हैं।
दूसर� संदे�: यद� आप जो कर रह� है� वह कठिन प्रती� होता हो, यह इसलि� क्योंक� यह ऐस� ही है� दुनिया भर मे� महिलाओ� तथ� लड़कियो� के खिला� हिंस� हजारों वर्षों से हर समाज मे� मौजू� रह� है� यद� इस� रोकन� आसान होता तो हम ऐस� अब तक कर चुके होते�
नजरिये मे� बदला� लाना हमेश� से ही कठिन रह� है� संस्कृति मे� गहरे जुड़े व्यवहा� को बदलन� तो और भी कठिन� उसमे� निहि� स्वार्� उनके विशेषाधिकारो� के खिला� उठ खड़� होता है� जैसा कि गांधी जी ने कह� था: “पहल� तो लो� आपको नजरअंदाज करेंगे, तब वे आप पर हंसेंग�, फि� वे आपसे मुकाबल� करेंगे और तब आपकी जी� होगी।� आप मुकाबल� के चर� पर हैं। अगला चर� आपकी जी� है�
तीसर� संदे�: हम-आप प्रगति कर रह� हैं। निःसन्दे�, महिलाए�, लड़किया�, जो सामाजि� रू� बहिष्कृत है� उन्हें यहां भारत समेत अभी भी पूरी दुनिया भर मे� कई सारी चुनौतिया� झेलती हैं। 21वी� सदी के बारे मे� सबसे बड़� तथ्य है कि चीजे� अब बेहत� हो रही हैं। धीरे-धीरे हो रही है, और बिना संघर्ष के नहीं। पर वे बेहत� हो रही हैं।
दुनिया भर मे� अब ज्यादा संख्या मे� लड़किया� स्कू� जा रही है�- और यद� सफ� विका� की को� जादू� छड़ी होती तो वह होती - लड़कियो� को शिक्षि� करना� दुनिया भर मे� महिलाए� अब कार्यब� का हिस्सा बन रही है�, अब वे राजनीति मे� अधिक सक्रिय है�, अपने जीवन के बारे मे� अधिक से अधिक फैसल� ले रही है�: यानी कब उन्हें शादी करनी है, कब बच्च� करने है�, कहां रहना है, कहां का� करना है, क्या पहनन� है, किसे वो� करना है, अपने सम� को कैसे व्यती� करना है�
चौथा संदे�: आप अकेल� नही� हैं। जैसा कि फ्रेंच लेखक विक्टर ह्यूगो ने कह� था: “दुनिय� भर की सभी ताकतें उतनी ताकतवर नही� है�, जितन� की वह विचा� जिसक� सम� � चुका होता है।� और वह मानन� कि हर किसी के समान अधिकार है�, एक ताकतवर विचा� है, जिसे हराय� नही� जा सकता है� नारीवा� एक क्रांतिकारी विचा� है, जो मानत� है कि महिलाए� भी इंसा� होती हैं।
इसलि� महिलाओ�, लड़कियो� तथ� समाज के बहिष्कृतों, हाशि� पर रहने वालो� के अधिकारों के लि� लड़ने का अर्थ है कि आप इतिहास के सही पक्ष पर टिके हैं। और यह साझी लड़ाई है� दुनिया के अन्य देशो� की तर� ही इस बारे मे� ब्रिटे� की अपनी चुनौतिया� हैं। सा� मिलक� का� कर हम एक-दूसर� की मद� कर सकते है� और आप� मे� सी� सकते हैं। सा� मिलक� हम और मजबू� बन जाते हैं।
यहां भारत मे� सामाजि� परिवर्तन के लि� शक्तिशाली गठबंधन मे� इजाफ� हो रह� है� प्रधान मंत्री श्री मोदी ने खु� भी महिलाओ� तथ� लड़कियो� के खिला� हिंस� के बारे मे� कह� है� इस महान दे� की अपनी यात्रा के दौरा� हर कही� जहां मै� लोगो� से मिला- चाहे वे राजनेत� हो�, नौकरशा� हो�, एमपी, व्यवसायी, लेखक, रिपोर्टर, कलाकार, कार्यकर्ता हो, वे सभी महिलाओ� के अधिकारों और सभी के लि� न्या� के लि� का� कर रह� हैं। मै� उन सभी की सराहना करता हूं।
भारत से मुझे काफी उम्मी� है� मुझे लगता है यह एक महान दे� है जिसक� भविष्य उज्जवल है� पर भविष्य के बारे मे� अनुमान लगान� के लि� सर्वोत्त� तरीका है उसका संधा� करना� मै� आप सभी को प्रोत्साहि� करता हू� कि आप बाहर जाइए और उस भारत का संधा� कीजि�, जो आप चाहत� हैं।